जब इक़बाल ने "सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा" तरन्नुम में सुनाई।

पंजाब युनिवर्सिटी लाहौर में अल्लामा इक़बाल प्रोफ़ेसर थे जो वहाँ दर्शनशास्त्र पढ़ाते थे। उसी समय लाला हरदयाल वहां से संस्कृत

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