जब शायर ए इंक़िलाब जोश मलीहाबाद ने कहा मेरा नारा ‘इंक़िलाब -इंक़िलाबो इंक़िलाब’

‘शब्बीर हसन जोश’ या ‘जोश मलीहाबादी’ को शायर-ए-इंक़लाब भी कहा जाता है. तरक़्क़ीपसंद तहरीक और मार्क्सवाद से प्रभावित जोश ने

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