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देश को समर्पित मौलवी बरकतुल्लाह भोपाली का ख़त हसरत मोहानी के नाम

21 फ़रवरी 1905 को मौलवी बरकतुल्लाह भोपाली ने इंग्लैंड से भारत एक ख़त हसरत मोहानी को फ़ारसी भाषा में भेजा था; जिसका हिंदी तर्जुमा हम आपके सामने पेश कर रहे हैं।

“हिंदू मुस्लिम इत्तेहाद पर अख़बार में आपकी तहरीर को पढ़कर बहुत ख़ुशी हुई; साथ ही कांग्रेस के सालाना इजलास में मुसलमानों को कांग्रेस में शामिल होने की जो दावत आपने दी उसको भी यहां के अख़बार में पढ़ने का मौका मिला।

गुज़िश्ता दस साल बड़े खौफ़नाक रहे हैं जिसमें अनक़रीब 2 करोड़ भारतीयों की भूख से मौत हुई है, अगर हम इन हालातों का मुक़ाबला ईरान की आबादी से करे जो कि 1.5 करोड़ है, तो उससे हमें पता चलता है के हालात कितने बदतर है कि एक मुल्क़ की आबादी के बराबर लोग हमारे यहां भूख से मर गए जिसमें हिंदू और मुसलमान दोनों शामिल है।

आखिर हमारे मुल्क़ में इतनी गरीबी कैसे आई?

1- जब हमारे देश में अंग्रेज़ों का कब्ज़ा हो गया तो उन्होंने इंग्लैंड में बना सामान जैसे कपड़े, बर्तन, हथियार और भी अहम चीज़े हमारे मुल्क में भेजना शुरू कर दिया, जिससे लोकल कारख़ानों को बहुत नुक़सान पहुंचा।

19वी सदी में ब्रिटिश हुक़ूमत ने एक बिल ब्रिटिश पार्लियामेंट में पास किया जिसमें 70-80 % कर भारत से इंग्लैंड आने वाले सामान पर लगा दिया जबकि ब्रिटेन से जाना वाला सामान बिना किसी कर के भारत जा सकता है।

इसी वजह से ब्रिटिश सामान हमारे बाज़ार में बहुत ही सस्ती कीमत पर मिलता है जिसकी क़ीमत हमारे मुल्क़ में बनने वाले सामान से भी कम होती है, जिसका असर भारत के लोकल कारख़ानों पर पड़ने लगा और धीरे-धीरे ये उद्योग बंद होते गए और लोगों ने किसानी करना शुरू कर दिया। जो मुल्क़ एक समय में अपनी कला-महारत के लिए जाना जाता था वो किसानों का देश बन गया।

2- यूरोप के पूंजीपति भारत में सस्ते प्रोडक्ट खरीदते हैं और यूरोप जाकर ऊंचे दामों पर बेचते हैं जिससे उन्हें काफी मुनाफ़ा होता है।

3- हमारे देश में खेती वही परंपरागत तरीके से की जाती है ना कि आधुनिक तरीके से।

4- विदेशों में भारतीय एंबैसी चलाने, भारत में काम करने वाले ब्रिटिश अधिकारीयों को पेंशन देने और उद्योगपतियो का कर्ज़ चुकाने के लिए भारत से 30 करोड़ रूपये इंग्लैंड ले जाया जा चुका है।

5- भारतियों को अहम ज़िम्मेदारी वाले पदों से दूर रखा गया ये पोस्टें सिर्फ ब्रिटिश के लिए ही रिज़र्व की गई।

6- लॉ और सिविल सर्विसेज की तैयारी करने वाले भारतीय छात्रों को इंग्लैंड जाकर परीक्षा देने के लिए मजबूर किया जाता है।

ये तो महज़ चंद कारण है जिन्हें गिनाए जिससे हमारे मुल्क़ के लोगों पर आर्थिक राजनीतिक बोझ पड़ा है और इसी वजह से हमारी विरासत; हमारी अर्थव्यवस्था बरवाद हो गई है।

ये मेरा मशवरा है भारतीय मुसलमानों के लिए कि कांग्रेस ज्वाइन करे और हमारे हिंदू भाईयों के साथ मिलकर देश को आज़ाद करायें।
ये ही असल मायने में सच्चा दीन है अगर हम ऐसा नहीं करेगा तो खुद भी कमज़ोर होगे और राष्ट्रीय एकता को भी कमज़ोर करेगे।

मौलाना बरकतुल्लाह भोपाली

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इंक़िलाब ज़िन्दाबाद का नारा देने वाले स्वतंत्रता सेनानी और संविधान सभा के सदस्य रहे हसरत मोहानी ने सबसे पहले पूर्ण स्वराज की माँग की थी। वहीं मौलवी बरकतुल्लाह भोपाली एक महान विद्वान थे, जिन्होंने विदेशों में भारत की आज़ादी के संघर्ष करते हुवे; ग़दर पार्टी बनाने में अहम रोल अदा किया, साथ ही वो 1915 में काबुल में बनी आरज़ी हुकूमत ए हिंद में प्रधानमंत्री थे।   

 


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