पटना की हिंदी पत्रकारिता में पाटलिपुत्र का योगदान

  बांकीपुर में संपन्न भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 27 वें अधिवेशन ने बिहार के राजनैतिक जीवन में उथल-पुथल मचा दी

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हिन्दी के निर्माण में बिहार बन्धु प्रेस का योगदान

  सन् 1846 ईस्वी के पूर्व बिहार में कहीं भी मुद्रणालय की नींव नहीं पड़ी थी। बैप्टिस्ट मिशन के अधिकारियों

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जब एक मुग़ल शहज़ादी के क़ौल पर हिंदू राजपूतों ने अपनी जान लड़ा दी।

“अस्मत ए चागताई वा राजपुत यक अस्त।” साल था 1682 यही कोई जून जुलाई का महीना रहा होगा। बादशाह औरंगज़ेब

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शाह मुहम्मद उस्मानी, एक पत्रकार जिसने स्वतंत्रता संग्राम में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया।

शाह मुहम्मद उस्मानी का जन्म 1915 में बिहार के गया ज़िला के सिमला में जिस समय हुआ, वो ख़िलाफ़त तहरीक

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मोहसिन दरभंगवी, एक आदर्श शिक्षक के साथ एक संजीदा शायर

  आम तौर से बिहार, और खास तौर से दरभंगा के अदबी हलकों (साहित्यक मंडलीयों) में मोहसिन दरभंगवी (1905–1992) का

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ब्रजकिशोर प्रसाद : स्वतंत्रता संग्राम का एक महानायक

    ब्रजकिशोर प्रसाद का जन्म 14 जनवरी 1877 को सारण के श्रीनगर गाँव में एक कायस्थ परिवार में हुआ

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जब सोहैल अज़ीमाबादी के क़लम की ताक़त से बंद हुआ कलकत्ता का ‘हमदर्द’ अख़बार

  द्वारका हाई स्कूल, मुज़फ़्फ़रपुर में सोहैल अज़ीमाबादी ने 9वीं में दख़ला करवाया गया, वहीं से 1930 में उन्होंने मैट्रिक

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राष्ट्रवाद का पैमाना : फणीश्वरनाथ रेणु जो बेहिचक भारत माता के साथ नेपाल को भी अपनी माँ बोलता था।

Shubhneet Kaushik “मैला आँचल” के अप्रतिम रचनाकार रेणु को याद करते हुए आज “मैला आँचल” और “परती परिकथा” सरीखी कालजयी

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अंग्रेज़ पुलिस पूछताछ के नाम पर भारतीय महिलाओं पर करती थी ‘निर्भया’ जैसा अत्याचार

Md Umar Ashraf सभी को याद होगा कि 16 दिसंबर, 2012 को जब दिल्ली में निर्भया का बलात्कार कर उसके

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श्रद्धांजलि : प्रसिद्ध आलोचक नामवर सिंह का निधन

Shubhneet Kaushik  हिंदी के अप्रतिम आलोचक और साहित्यकार नामवर सिंह (1927-2019) का कल देर रात निधन हो गया। ‘वाद-विवाद-संवाद’ के

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नामवर सिंह: कितना सच, कितना झूठ

Jayant Jigyasu ओजस्वी आलोचक नामवर सिंह जी को रुबरू बस एक बार सुना था डीयु में रामविलास शर्मा की जन्मशती

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दिनकर : अपने समय का सूर्य

  भुलक्कड़ कालेलकर दसवीं कक्षा की हिंदी पाठ्य-पुस्तक में काका साहब कालेलकर का कोई निबंध पढ़ना था। इसलिए कायदे से

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राधाविनोद पाल : एक भारतीय जो भारत से ज़्यादा जापान में याद रखा गया।

प्रसन्न प्रभाकर कलकत्ता हाई कोर्ट के एक जज, कलकत्ता यूनिवर्सिटी के उपकुलपति एवं कई न्यायिक आयोगों के सदस्य रह चुके

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हम बैरिस्टर मुहम्मद युनूस जैसे लोगों को याद रखते तो आज हालात अलग होते…

प्यूष मिश्र आज सोशल मीडिया में जिन्ना का जिन्न ट्रेंड कर रहा है और मैं आपसे बिहार के पहले मुख्यमंत्री(प्रीमियर)

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जब फांसी के फंदे पर लटका दिये गए शेर अली अफ़रीदी!

शेर अली अफ़रीदी यही नाम है उस महान देशभक्त का जिसे ब्रिटिश हुकूमत के वायसराय लार्ड मायो के क़त्ल के

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जब रेणु ने कहा : 'पद्मश्री' सम्मान अब मेरे लिए 'पापश्री' बन गया है।

मुहम्मद दानिश 4 मार्च 1921 को देशज अस्मिता और लोकजीवन के महान रचनाकार फणीश्वरनाथ रेणु का जन्म औराही हिंगना,अररिया बिहार

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जब हिन्दु मुस्लिम एकता के सबसे बड़े पैरवीकार मौलाना मज़हरुल हक़ को हिन्दु और मुसलमानो ने मिल कर चुनाव हरवा दिया।

अपने अख़बार ‘दी मदरलैंड’ में सरकार के ख़िलाफ़ लिखने के अभियोग में 26 जुलाई 1922 को मौलाना मज़हरुल हक़ गिरफ़्तार

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