Sultan Ahmed fought for united India risking his own life

Question: What is the difference between India and other nations?  Answer: While other nations of the world construct memorials in

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जब डॉक्टर फ़रीदी और पेरियार ने नारा दिया “अक़लियतो का नारा हिंदुस्तान हमारा”

    जब सर्वप्रथम पेरियार उत्तर प्रदेश लखनऊ आये! [दो दिवसीय सम्मेलन की डिटेल] आल इण्डिया शेडूलड कास्ट, मायनोरिटीज़, बैकवर्ड

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अरवल नगर परिषद अध्यक्ष के लिए रोज़ी नाज़ का नामांकन और शाह परिवार का दोहराता इतिहास

  बिहार के अरवल नगर परिषद अध्यक्ष पद की उम्मीदवार रोज़ी नाज़ (पति शाह इमरान अहमद) ने अपना नामांकन दाख़िल

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जब मुज़फ़्फ़रपुर में एक युरोपियन क्लब के मुक़ाबले में खुला मुस्लिम क्लब

युरोपियन लोगों ने बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर में एक युरोपियन क्लब 1885 में क़ायम किया, जिसमें किसी भी भारतीय का दाख़िल

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चंबल की धरती का अनोखा क्रांतिकारी : दादा शंभूनाथ आजाद

  किसी भी तरह के अन्याय व शोषण का प्रतिरोध चंबल के जनमानस की पहचान मानी जाती है। प्राचीन काल

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कभी था नवाबों का दफ़्तर, अब पर्यटकों के लिए तरस रहा भोपाल का गोलघर

वैसे तो भोपाल एक खुबसूरत और ऐतिहासिक शहर है जिसके कण-कण में इतिहास की कहानियां दर्ज हैं। नवाबों के शासन

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भारत की जंग ए आज़ादी में मुहर्रम का योगदान

  इस साल मुहर्रम और अगस्त का महीना एक साथ पड़ा है। एक तरफ़ जहां भारत की आज़ादी का जशन

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वासेपुर: धनबाद के दो बड़े उद्योगपति एम.ए. जब्बार और एम. ए. वासे की विरासत

ये कहानी है धनबाद के दो सबसे बड़े और प्रसिद्ध उद्योगपतियों की जो अपने सगे भाई भी थे। ये कहानी

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अली अशरफ़ उर्फ़ ज्ञान चंद, भारत का एक एक इंक़लाबी रहनुमा

  1918 में अली अशरफ़ की पैदाइश जिस वक़्त हुई, उस वक़्त रूस में क्रांति हो चुकी थी, और उसका

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अल्लामा जमील मज़हरी – एक अज़ीम फ़नकार जिसे अंग्रेज़ों ने जेल की सलाख़ों के पीछे रखा।

  जमील मज़हरी का असल नाम सैयद काज़िम अली था। वालिद का नाम ख़ुर्शीद हसनैन था। उनकी पैदाइश सितम्बर 1904

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पटना की हिंदी पत्रकारिता में पाटलिपुत्र का योगदान

  बांकीपुर में संपन्न भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 27 वें अधिवेशन ने बिहार के राजनैतिक जीवन में उथल-पुथल मचा दी

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हिन्दी के निर्माण में बिहार बन्धु प्रेस का योगदान

  सन् 1846 ईस्वी के पूर्व बिहार में कहीं भी मुद्रणालय की नींव नहीं पड़ी थी। बैप्टिस्ट मिशन के अधिकारियों

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एहसान अज़ीमाबादी ~ बिहार का एक गुमनाम शायर

एहसान हसन खां एहसान–इतिहास के पन्नों से बिहार की धरती, सदियों से शिक्षा, संस्कृति और साहित्य के क्षेत्र में समृद्ध

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ज़फ़र हमीदी, एक हाफ़िज़ जो इंग्लैंड में मेडिकल पढ़ाई के दौरान शायर बन गया

ज़फ़र हमीदी का असल नाम मुहम्मद सादउल्लाह हमीदी था। इनका जन्म 26 अगस्त 1926 को बिहार के सीतामढ़ी ज़िला के

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