सच्चिदानंद सिन्हा : एक जन्मजात चक्रवर्ती

दसवीं की हिंदी की किताब में जगदीश चंद्र माथुर का एक पाठ पढ़ना होता था। शीर्षक था-‘एक जन्मजात चक्रवर्ती’। इस

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पटना की हिंदी पत्रकारिता में पाटलिपुत्र का योगदान

  बांकीपुर में संपन्न भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 27 वें अधिवेशन ने बिहार के राजनैतिक जीवन में उथल-पुथल मचा दी

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हिन्दी के निर्माण में बिहार बन्धु प्रेस का योगदान

  सन् 1846 ईस्वी के पूर्व बिहार में कहीं भी मुद्रणालय की नींव नहीं पड़ी थी। बैप्टिस्ट मिशन के अधिकारियों

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संस्कृत भाषा जिसपर हम गर्व करते हैं, की खोज विदेशियों ने ही की- चाहे वे इंग्लैण्ड के हों या जर्मनी के।

  आज हम जिस संस्कृत भाषा और साहित्य की प्राचीनता पर गर्व करते हैं, उसकी खोज विदेशियों ने ही की-

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प्रेमचंद और किसान आंदोलन

  प्रेमचंद की रचना की भाषा किसान-चेतना और संघर्ष की भाषा है। उन्हें समझौते की भाषा में तनिक विश्वास न

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दिनकर : अपने समय का सूर्य

  भुलक्कड़ कालेलकर दसवीं कक्षा की हिंदी पाठ्य-पुस्तक में काका साहब कालेलकर का कोई निबंध पढ़ना था। इसलिए कायदे से

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बिहार के पृथक राज्य बनने का इतिहास :

  बिहार की प्रशासनिक पहचान का विलोप 1765 में हो गया जब ईस्ट इंडिया कम्पनी को दीवानी मिली. उसके बाद

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जनता ने नहीं, कायस्थों ने बनाया अलग बिहार

  बंगाल से बिहार को अलग किये जाने की घटना को ‘बिहार की जनता की जीत’ एवं ‘हिंदू-मुस्लिम एकता’ के

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बिहार में किसान आन्दोलन और सहजानंद सरस्वती

  बिहार में किसान आंदोलन की एक समृद्ध परंपरा रही है। चंपारण का सन् 1917 का किसान आंदोलन इसी की

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